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हिमाचल में फिर बारिश का दौर, 48 घंटे तीन जिलों में यलो अलर्ट; मानसून में 1,235 करोड़ का नुकसान

➤ हिमाचल में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट, तीन जिलों में यलो चेतावनी

➤ मानसून में बारिश से 1,235 करोड़ की सरकारी-निजी संपत्ति तबाह

➤ 266 लोगों की मौत, 111 घर पूरी तरह जमींदोज और 472 को आंशिक नुकसान


शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और अगले 48 घंटे प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार को अलग-अलग जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को बिलासपुर, कांगड़ा और सिरमौर में जबकि शनिवार को बिलासपुर, कांगड़ा और सोलन में तेज बारिश की संभावना जताई गई है।

हालांकि मौसम विभाग के अनुसार रविवार से मानसून के कमजोर पड़ने के आसार हैं। इसके बाद 8 सितंबर तक प्रदेश के किसी भी जिले में बारिश का अलर्ट नहीं है। ऐसे में अगले दो दिन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से भूस्खलन और बारिश के कारण सड़कें एवं अन्य बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है।

1,235 करोड़ की संपत्ति तबाह

इस मानसून सीजन में बारिश ने हिमाचल को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। 1 जून से 3 सितंबर तक प्रदेश में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से सरकारी और निजी संपत्ति को करीब 1,235 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग को उठाना पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक अकेले PWD की करीब 946 करोड़ रुपये की संपत्ति बारिश की वजह से तबाह हुई है। सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचा लगातार खराब मौसम की मार झेल रहा है।

पहाड़ी राज्य में लगातार होने वाली बारिश का सबसे सीधा असर सड़क संपर्क पर पड़ता है। भूस्खलन के कारण कई जगह सड़कें बाधित होती हैं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों का संपर्क प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी प्रशासन और यात्रियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

111 घर पूरी तरह जमींदोज, 472 को आंशिक नुकसान

मानसून की बारिश ने प्रदेश में बड़ी संख्या में घरों को भी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 111 घर पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 472 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

लगातार बारिश के दौरान कमजोर पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अगले 48 घंटे विशेष सतर्कता वाले हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और अनावश्यक रूप से जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचने की जरूरत है।

मानसून में 266 लोगों की मौत

इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़े और अन्य हादसों में प्रदेश में 266 लोगों की मौत हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें 158 मौतें सड़क हादसों में हुईं। इसके अलावा 18 लोगों की जान लैंडस्लाइड, 13 की पानी में डूबने और एक व्यक्ति की मौत फ्लैश फ्लड के कारण हुई है। अन्य मौतें अलग-अलग कारणों से हुई हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि मानसून के दौरान हिमाचल में सिर्फ भारी बारिश ही चुनौती नहीं होती, बल्कि सड़क हादसे, भूस्खलन, अचानक बढ़ता जलस्तर और फ्लैश फ्लड जैसे खतरे भी लगातार बने रहते हैं।

खासकर पहाड़ी सड़कों पर बारिश के दौरान दृश्यता कम होने, सड़क पर मलबा आने और फिसलन बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी के दौरान वाहन चालकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपेक्षा रहती है।

सामान्य से 8 फीसदी कम हुई बारिश

दिलचस्प बात यह है कि इतने बड़े नुकसान के बावजूद इस बार हिमाचल में मानसून की कुल बारिश सामान्य से 8 फीसदी कम रही है। 1 जून से 3 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य बारिश 630.2 मिलीमीटर मानी जाती है, जबकि इस अवधि में 578.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

यानी पूरे प्रदेश के स्तर पर बारिश सामान्य से कम रही, लेकिन जिन क्षेत्रों में कम समय में तेज बारिश हुई, वहां इसका असर बेहद गंभीर रहा। यही वजह है कि कम कुल बारिश के बावजूद भूस्खलन, सड़क क्षति, घरों को नुकसान और जानमाल के नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं।

रविवार से कमजोर पड़ेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना है। शुक्रवार को बिलासपुर, कांगड़ा और सिरमौर में जबकि शनिवार को बिलासपुर, कांगड़ा और सोलन में यलो अलर्ट जारी किया गया है।

इसके बाद रविवार से मानसून के कमजोर पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 8 सितंबर तक प्रदेश के किसी भी जिले के लिए बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। इससे लोगों और प्रशासन को बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बहाली के काम को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

अगले 48 घंटे लोगों के लिए अहम

अगले दो दिन हिमाचल के लिए मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है, वहां लोगों को नदी-नालों और खड्डों के आसपास जाने से बचना चाहिए। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन संभावित स्थानों पर अनावश्यक यात्रा से बचना भी जरूरी है।

बारिश के दौरान सड़क पर मलबा आने या अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में वाहन चालकों और यात्रियों को जोखिम लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

मानसून सीजन में हिमाचल पहले ही 1,235 करोड़ रुपये के नुकसान और 266 मौतों का दर्द झेल चुका है। ऐसे में अगले 48 घंटे की बारिश भले ही कुछ जिलों तक सीमित रहने की संभावना हो, लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए सावधानी सबसे जरूरी है।